मेरठ, नवम्बर 28 -- समाज की वास्तविकताएं अपनी रचनाओं के जरिए दिखाना साहित्यकार की जिम्मेदारी है। इस दायित्व को किसी लोकभय या आकर्षण से नहीं दबाया जा सकता। आईआईएमटी विवि के स्कूल ऑफ ह्यूमेनेटीज एंड मास कम्युनिकेशन के साहित्यिक समारोह में हुए 'मीट द ऑथर' कार्यक्रम में यह बात उपन्यासकार प्रो.विकास शर्मा ने कही। प्रो. शर्मा ने कहा उन्हें अपने उपन्यासों के जरिए समाज एवं उच्च शिक्षा की सच्चाई दिखाने की कीमत चुकानी पड़ रही है। प्रो.शर्मा के अनुसार जब भी कोई कलमकार भ्रष्ट एवं तानाशाहों को आईना दिखाएगा तो उसे ग्रीक दार्शनिक सुकरात की तरह जहर का प्याला पीना ही पड़ेगा। प्रो.विकास शर्मा ने बुद्धिजीवियों, पत्रकारों एवं लेखकों से अपील की वे किसी भी विचारधारा विशेष के पोषक बनकर कार्य न करें। सरकारों की लोक कल्याणकारी योजना एवं नीतियों की सराहना तो जरूर करे...