कोलकाता, जनवरी 6 -- तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की बगावत ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में मुस्लिम सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों को सुर्खियों में ला दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कबीर की नई पार्टी और बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा ने टीएमसी के अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाने की अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि, इतिहास गवाह है कि बंगाल में ऐसे दौर बार-बार आते हैं, लेकिन मतदान के दिन कुछ और ही गणित हावी होता है। दशकों से बंगाल में अल्पसंख्यक मतदान पैटर्न काफी हद तक स्थिर रहा है। यह धार्मिक करिश्मे या प्रतीकात्मक दावों से कम, बल्कि संगठन, गठबंधन और वोट एकजुटता से ज्यादा प्रभावित होता है। 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए मार्च-अप्रैल 2026 में होने वाले चुनावों में कबीर की बगावत जैसे एपिसोड ट...