नई दिल्ली, जनवरी 12 -- ईरान एक बार फिर सुलग रहा है। जनवरी 2026 की कड़कड़ाती ठंड में तेहरान से लेकर मशहद तक सड़कों पर जो नारे गूंज रहे हैं, उनमें एक नाम बार-बार आ रहा है- रजा पहलवी। यह उसी 'शाह' (राजा) के बेटे हैं जिन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति में देश छोड़कर भागना पड़ा था। प्रदर्शनकारी अयातुल्ला खामेनेई के शासन से तंग आ चुके हैं और 'शाह' की वापसी चाहते हैं। सुनने में यह लोकतंत्र की जीत जैसा लग सकता है, लेकिन अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें, तो भारत के लिए यह जश्न मनाने का नहीं, बल्कि सावधान होने का समय हो सकता है। क्यों? क्योंकि इतिहास गवाह है कि ईरान का 'शाह' परिवार पाकिस्तान का 'सगा यार' था, जबकि कट्टरपंथी अयातुल्ला शासन अनचाहे में ही सही, भारत के लिए रणनीतिक तौर पर मददगार साबित हुआ। आइए समझते हैं यह पूरा समीकरण।फ्लैशबैक: जब 'शाह' के विमा...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.