हरिद्वार, मार्च 28 -- उत्तराखंड संस्कृत विवि में शुक्रवार को आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने संस्कृत शास्त्रों में मानवीय व्यवहार और भारत की गौरवशाली परम्पराओं पर विचार रखे। गोष्ठी के मुख्य अतिथि देव संस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में सभी सिद्धांत और तथ्य अंतर्निहित है। गणित में प्रयोग होने वाला पाइथागोरस का प्रमेय, पाई का सिद्धांत और विज्ञान में प्रयुक्त गुरुत्वाकर्षण के नियम यह सारा भारतीय संस्कृत शास्त्रों में सर्वप्रथम उद्धृत हुआ था। हमारी शिक्षा व्यवस्था प्रभावी नहीं होने के कारण हमें इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए पश्चिमी देशों का अनुसरण करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति को अपने जीवन को उत्कृष्ट से उत्कृष्टतम की ओर ले जाना है, तो उनको संस्कृत शास्त्रों में निहित नियमों तथा उस ज्ञान...
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