फरीदाबाद, अक्टूबर 10 -- फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम बात बन चुकी है। काम का बढ़ता दबाव, पढ़ाई का तनाव, भविष्य की चिंता या रिश्तों की उलझनें ये सब मिलकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं। यदि यह तनाव लंबे समय तक रहता है तो यह मानसिक के साथ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो साबित हो रहा है। इसके चलते लोगों में आत्म हत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार आज भागदौड़ भरे जीवन ने लोगों के सुकून को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा हर जगह काम का दबाव युवा पीढ़ी को मानसिक रूप से बना रहा है। इसके अलावा संयुक्त परिवारों का विघटन भी मानसिक परिवारों के बढ़ने के प्रमुख कारणों में से एक है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि पहले संयुक्त परिवार होते थे। लोग एक दूसरे का सुख-दुख ...
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