नवादा, जनवरी 8 -- नवादा। राजेश मंझवेकर नवादा जिले का भदौनी पशु हाट कभी केवल एक बाजार नहीं, बल्कि मगध और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों के पशुपालकों के लिए उम्मीद का केंद्र हुआ करता था। लेकिन आज यह हाट अपनी बदहाली की दास्तां खुद बयां कर रहा है। धूल, कीचड़, प्यास और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच यह ऐतिहासिक हाट अब अंतिम सांसें गिन रहा है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित रह जाएगा। भदौनी पशु हाट का अस्तित्व खतरे में होना नवादा की कृषि-अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया, तो पशुपालक पूरी तरह से इस व्यवसाय से किनारा कर लेंगे। यह न केवल एक बाजार का अंत होगा, बल्कि नवादा की उस सांस्कृतिक पहचान का भी अंत होगा जहाँ कभी मेलों जैसा उत्साह रहता था। प्रशासन को टैक्स वसूली से आग...
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