नई दिल्ली, फरवरी 14 -- हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा में तुलसी का उपयोग वर्जित माना जाता है। अन्य देवताओं की पूजा में तुलसी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, लेकिन शिव जी को तुलसी चढ़ाने से बचने की परंपरा पुरानी है। इसके पीछे एक गहरी पौराणिक कथा छिपी है, जो विष्णु जी के श्राप और तुलसी के पूर्व जन्म से जुड़ी हुई है। यह कथा भक्ति के साथ-साथ कर्म और श्राप के नियमों को भी स्पष्ट करती है। आइए इस कथा और इसके कारणों को विस्तार से समझते हैं।तुलसी का पूर्व जन्म और वृंदा की कथा पुराणों के अनुसार तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा नाम की एक पतिव्रता स्त्री के रूप में हुआ था। वृंदा असुरराज जालंधर की पत्नी थीं। जालंधर भगवान शिव का ही अंश था, लेकिन अपने बुरे कर्मों के कारण वह राक्षस कुल में जन्मा था। जालंधर की पत्नी वृंदा की पतिव्रता शक्ति इतनी प्रबल थी कि कोई भ...