गिरडीह, फरवरी 9 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ टोंक पर रविवार को साधु संतों के सानिध्य में विशेष पूजा प्रक्षाल किया गया। भगवान पार्श्वनाथ की शांतिधारा अभिषेक कर निर्वाण लाडू चढ़ाये गये। जैन ग्रंथ के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान पार्श्वनाथ को पर्वत की चोटी पर साधना आराधना करते हुए मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जैन परम्पराओं में सप्तमी तिथि को संयम व तप का विशेष महत्व है। बतला दें कि जैन धर्म के चौबीस में से बीस तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर में रविवार को साधु संतों के सानिध्य में भव्य धार्मिक अनुष्ठान किया गया। जैन परम्पराओं में सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है। सप्तमी तिथि को ही जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ साधना आराधना करते हुए पारसनाथ की पहाड़ी में निर्वाण को प्राप्त हुए ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.