बाराबंकी, दिसम्बर 14 -- रामसनेहीघाट। अध्यक्ष जगदीश गुप्ता के संयोजन में आयोजित श्रीराम कथा के अष्टम दिवस पर भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कथा व्यास परम पूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने कहा कि भक्ति के मार्ग में सबसे बड़ा बाधक लालच है। जब मनुष्य की भक्ति भगवान से हटकर भौतिक आकर्षणों में उलझ जाती है, तब वह ईश्वर प्राप्ति से दूर हो जाता है। महाराज जी ने स्वर्ण मृग प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सोने के प्रति आकर्षण ही दुखों का कारण बनता है। उन्होंने समझाया कि माता सीता स्वर्ण मृग नहीं चाहती थीं, लेकिन आकर्षण के कारण प्रभु श्रीराम से क्षणिक दूरी बन गई, जो आगे चलकर बड़े कष्टों का कारण बनी। शबरी प्रसंग पर प्रवचन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि शबरी की निष्कपट और अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर प्रभु...
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