अंबेडकर नगर, फरवरी 4 -- देवरिया बाजार, संवादाता। बड़े भाग्य से ही हमें मानव शरीर प्राप्त होता है और यह मानव शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है, ऐसा सभी सदग्रंथों की घोषणा है। यह मानव तन अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह साधन योनि है जिससे हम अपना परलोक सुधार सकते हैं, यह मानव तन ही मोक्ष का द्वार भी है। यह बाते मंगलवार को हुसेनपुर खुर्द में चल रही कथा के सातवें दिन अवध धाम से पधारे कथावाचक पंडित प्रेमशरन दास ने कही। उन्होंने कहा कि मानव शरीर के लिए तो देवता भी तरसते हैं। देव योनि तो भोग योनि है और अपने सत्कर्मों का सुख फल भोग कर पुन: देवों को स्वर्ग के इतर लोको में गिरकर अन्यान्य योनियों में भटकना पड़ता है। कथा प्रारंभ होने से पूर्व वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व जिला उपाध्यक्ष दिनेश पांडेय ने कथावाचक पंडित प्रेम शरन दास का माल्यार्पण कर स्वागत करते ...
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