नई दिल्ली, नवम्बर 28 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विधि आयोग से एक बौद्ध समूह की याचिका पर विचार करने को कहा है। याचिका में कहा गया है कि बौद्धों पर भी लागू होने वाले 'हिंदू पर्सनल लॉ' के कुछ प्रावधान धर्म की स्वतंत्रता समेत उनके मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 'बौद्ध पर्सनल लॉ एक्शन कमेटी' की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विधि आयोग से इसे एक प्रतिवेदन के रूप में माने। पीठ ने आगे कहा कि कुछ मौजूदा कानूनी प्रावधान बौद्ध समुदाय के मौलिक अधिकारों और सांस्कृतिक प्रथाओं के विपरीत हैं, जिसके मद्देनजर इस संवैधानिक और वैधानिक बदलावों की जरूरत है। पीठ ने कानून और न्याय मंत्रालय के दिसंबर 2024 के एक पत्र पर गौर किया जिसमें कहा गया था कि 21वां विधि आयोग समान नागरिक...