सीतापुर, नवम्बर 8 -- धान का उत्पादन काफी बेहतर था, किसान खुश थे मगर मौसम की मार ऐसी पड़ी कि बेमौसम बरसात ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। बची फसल कटकर किसानों के घर आ गई है। अब उसे बेचने में सभी के पसीने छूट रहे हैं। कहने को तो सरकार ने विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से खरीद केन्द्र खुलवाए हैं मगर वहां धान को बेचना किसान के बस में नहीं है। अधिकांश क्रय केंद्रों की स्थिति ऐसी है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए चार-पांच दिनों का इंतजार करना पड़ता है। किराए का ट्रैक्टर लेकर आया किसान भूखे प्यासे फसल की सुरक्षा में ठंड में रात गुजार रहा है। वहीं आगे गेहूं आदि की फसल को लगाने के लिए खाद बीज की चिंता भी उसे सता रही है। क्रय केंद्रों पर फैली अव्यवस्था ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। केंद्रों पर बैठने की व्यवस्था नहीं है, न पेयजल की ...
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