भागलपुर, जनवरी 25 -- -प्रस्तुति : श्रुतिकांत मिथिला क्षेत्र अपनी लोकसंस्कृति, सामाजिक परंपराओं और भावनात्मक रिश्तों के लिए सदियों से जाना जाता रहा है। यहां के लोकगीत जीवन के हर संस्कार से जुड़े रहे हैं। जन्म से लेकर विवाह और विदाई तक गीत ही भावनाओं की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति रहे हैं। इन्हीं लोकधाराओं में एक अत्यंत जीवंत परंपरा थी बारात के स्वागत गीत, जो आज धीरे-धीरे समाज से लुप्त होती जा रही है। परंपरागत मिथिला विवाह में शादी के दूसरे दिन मरजाद का विशेष आयोजन होता था। यह दिन औपचारिकता से अधिक आत्मीयता का प्रतीक माना जाता था। जब बाराती पंगत में बैठकर भोजन करते थे, तब घर की महिलाएं समूह बनाकर गीत गाती थीं। ये गीत केवल स्वागत भर नहीं होते थे, बल्कि उनमें रिश्तों की निकटता, हास्य और सामाजिक व्यंग्य भी समाहित रहता था। महिलाएं गीतों के माध्यम से ...
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