भागलपुर, नवम्बर 22 -- - प्रस्तुति : गोपाल कृष्ण जल संकट को रोकने में कुएं अत्यंत उपयोगी माने जाते हैं। इनके होने से क्षेत्र में जलस्तर संतुलित रहता है और जल स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। संकट की संभावना होने पर समय रहते उपाय भी किए जा सकते हैं। लेकिन बदलती जीवनशैली, सरकारी उदासीनता और रखरखाव की कमी के कारण आज कुएं अपनी प्रासंगिकता खोते जा रहे हैं। कई जगहों पर कुओं की दीवारें टूट चुकी हैं, सीढ़ियां धंस गई हैं और कुएं कचरे से भर गए हैं। कभी यही कुए गांववासियों की प्यास बुझाने, शादी-विवाह तथा सामाजिक मेलजोल का प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, पर अब अधिकांश सूख चुके हैं या गंदगी से पटे पड़े हैं। सलखुआ प्रखंड के लोगों ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रखंड क्षेत्र के गांवों में कभी सामाजिक जीवन, धार्मिक आस्था और रोजमर्रा के उपयोग का क...