भागलपुर, जनवरी 22 -- -प्रस्तुति: विजय झा सहरसा जिला क्षेत्र से होकर गुजरने वाली धेमरा नदी, जिसे स्थानीय लोग धर्ममुला नदी के नाम से भी जानते हैं, कभी इस इलाके की पहचान हुआ करती थी। यह नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति, सभ्यता और जीवन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका इतिहास त्रेता काल से जुड़ा बताया जाता है। कहा जाता है कि इसी नदी के तट पर ऋषि-मुनियों के आश्रम हुआ करते थे, जहां तपस्या और पूजा-अर्चना होती थी। समय बदला, लेकिन नदी का महत्व आज भी उतना ही है। बावजूद इसके, वर्तमान हालात बेहद चिंताजनक बनते जा रहे हैं। धेमरा नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। वर्षों से सरकारी फाइलों में दबे पड़े जीर्णोद्धार और बांध निर्माण की योजनाओं के कारण यह नदी लगातार सिकुड़ती जा रही है। नदी के दोनों किनारो...