भागलपुर, फरवरी 9 -- -प्रस्तुति: विजय झा किसी भी क्षेत्र के अतीत, उसकी सभ्यता और संस्कृति की वास्तविक जानकारी पुरातात्विक अवशेषों से ही प्राप्त होती है। लिखित इतिहास से पूर्व के कालखंड की झलक मिट्टी में दबे उन अवशेषों में छिपी होती है, जो समय-समय पर खुदाई या दैनिक गतिविधियों के दौरान सामने आते हैं। सहरसा अंचल का ग्रामीण क्षेत्र ऐसे ही बहुमूल्य पुरातात्विक साक्ष्यों से समृद्ध रहा है, लेकिन दुर्भाग्यवश इन धरोहरों के संरक्षण को लेकर आज भी गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। महिषी-बलुआहा मुख्य मार्ग के किनारे गोरहो टोला के समीप स्थित क्षेत्र इसका प्रमुख उदाहरण है। यह वही स्थल है, जहां वर्ष 1904 के दशक में अंग्रेजी शासन के दौरान धेमरा नदी के पूर्वी तट पर खुदाई कराई गई थी। उस दौरान मौर्य कालीन चांदी के 58 सिक्के, गोल्ड लीफ, तांबे की चूड़ियां सहित कई अ...
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