लखीसराय, फरवरी 12 -- ज्ञान, साहित्य और विचारों का केंद्र रही शहर की ऐतिहासिक सार्वजनिक लाइब्रेरी आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। वर्ष 1924 में स्थापित यह पुस्तकालय जो कभी युवक पुस्तकालय के नाम से जाना जाता था आज सरकारी उदासीनता, प्रशासनिक लापरवाही और योजनाओं की कमी के कारण बदहाली के दौर में पहुंच चुका है। जिस पुस्तकालय में कभी बुद्धिजीवियों, स्वतंत्रता सेनानियों, शिक्षकों और छात्रों की भीड़ लगा करती थी आज वहां सन्नाटा पसरा है और हजारों पुस्तकें धूल और दीमक के हवाले हो चुकी हैं। यह वही पुस्तकालय है जिसने आज़ादी के आंदोलन से लेकर सामाजिक और बौद्धिक चेतना को दिशा दी थी। लेकिन समय के साथ यह ज्ञान का मंदिर अब सिर्फ एक उपेक्षित सरकारी भवन बनकर रह गया है। 1924 में हुई थी स्थापना, गौरवशाली रहा इतिहास: शहर की इस सार्वजनिक लाइब्रेरी की स्था...
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