लखनऊ, नवम्बर 13 -- ऑनलाइन कैब संचालन करने वाली कंपनियां जहां मुनाफा कमा रही हैं वहीं गाड़ी मालिक, चालक और यात्री ठगे जा रहे हैं। इसके पीछे वजह यह है कि वर्ष 2020 में भारत सरकार ने एग्रीगेटर पॉलिसी तैयार की। आपत्तियों के निस्तारण के बाद साल 2022 में पॉलिसी लागू करने के लिए राज्यों को अधिसूचना जारी की गई। यह पॉलिसी ओला-उबर, इन ड्राइव, रैपिडो, बाइक टैक्सी जैसी कैब संचालन कराने वाली कंपनियों पर लागू होनी थी। कानून बन गया, पर कंपनियों ने इसे लागू नहीं कराया। इस पॉलिसी में प्रति किलोमीटर न्यूनतम किराया तय किया गया था। अब पॉलिसी को लागू कराने के लिए लखनऊ के करीब 10 हजार कैब चालक और वाहन मालिक आवाज उठा रहे हैं। कैब चालकों का कहना है कि इससे कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। नलाइन कैब बुकिंग की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। तब परिवहन विभाग ने अनुब...