रामगढ़, सितम्बर 8 -- उरीमारी। पतरातू का सयाल-सौंदा इलाका, जिसे काले हीरे यानी कोयले की खान के रूप में जाना जाता है, करोड़ों रुपये का राजस्व राज्य सरकार को देता है। लेकिन विडंबना यह है कि इतना बड़ा योगदान देने वाला यह इलाका स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पूरी तरह उपेक्षित है। यहां की छह पंचायतों को मिलाकर भी एक भी सरकारी उप-स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। नतीजतन 70-80 हजार की आबादी ग्रामीण डॉक्टरों के भरोसे इलाज कराने को मजबूर है। हिन्दुस्तान के बोले रामगढ़ की टीम से यहां के लोगों ने अपनी समस्याएं साझा की और सुधार की मांग की। रामगढ़ जिले का पतरातू प्रखंड कई मायने में खुशहाल है। काले हीरे (कोयले) की खान इस इलाके में आबाद है। एनटीपीसी जैसी बड़ी बिजली यूनिट झारखंड को ऊर्जा दे रही है। प्रखंड मुख्यालय से 8 किलोमीटर की दूरी पर काले हीरे की खदान के इर्द...
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