मेरठ, जनवरी 8 -- बसंत पंचमी आने वाली है और पतंग उड़ाने का माहौल बनने लगा है। पहले पतंग उड़ाने में लोग धागे वाला मांझा प्रयोग किया करते थे, लेकिन अब चाइनीज मांझा बहुत ज्यादा प्रयोग होने लगा है। अगर किसी व्यक्ति की गर्दन पर धागे वाला मांझा लग जाता था तो वह टूट जाता था और व्यक्ति को चोट नहीं लगती थी, लेकिन चाइनीज मांझा प्लास्टिक का होता है, ऊपर से उस पर कांच चढ़ा होता है, जिसके चलते यह किसी की गर्दन पर अटक जाए तो वह टूटता नहीं है, बल्कि खिंचता चला जाता है और चाकू की तरह गर्दन को काट देता है। जिससे आए दिन लोगों की जान भी जा रही है। वहीं बहुत सारे पक्षियों की मौत भी चाइनीज मांझे से हो रही है। वहीं सामने आया है कि मेरठ चाइनीज मांझे का गढ़ बन चुका है। दूसरे प्रदेशों में भी मेरठ से चाइनीज मांझा सप्लाई हो रहा है। धरती से लेकर आसमान तक इस कातिल मां...
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