मुजफ्फर नगर, नवम्बर 22 -- विकास की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ते उत्तर प्रदेश में एक कस्बा ऐसा भी है, जो सरकारी स्वीकृति के 48 साल बाद भी एक बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है। यह कहानी है मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे की, जहां 1977 में स्वीकृत हुई सरकारी उप मंडी आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। यह सिर्फ एक अधूरी परियोजना की दास्तां नहीं, बल्कि हजारों किसानों की बेबसी, व्यापारियों की लाचारी और प्रशासनिक सुस्ती का जीता-जागता प्रमाण है। इस चुनावी मौसम में जब विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब बुढ़ाना का यह अधूरा सपना सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। शाहपुर को मिली मंडी, बुढ़ाना के हिस्से आया सिर्फ इंतजार बुढ़ाना। बात वर्ष 1977 की है। देश में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी थी और उत्तर प्रदेश में रामनरेश यादव मुख्यमंत्री थे। उस...
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