मुजफ्फर नगर, नवम्बर 23 -- साल 1999 में जिस मेरठ-पानीपत नई रेल लाइन को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच सीधी कनेक्टिविटी का स्वप्न दिखाया गया था, वह आज भी हकीकत से कोसों दूर है। 104 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक के लिए 3540.75 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक मंजूरी और स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन राजनेतिक अड़चनें ऐसी फंसीं कि परियोजना कागजों से आगे बढ़ ही नहीं पाई। हरियाखेड़ा जैसे सैंकड़ों गांव, जो इस लाइन से विकास की उम्मीद लगाए बैठे थे, अब मायूसी और आक्रोश के साथ वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। प्रतीकात्मक आवंटन, ठंडे बस्ते में योजना हालिया बजटों में इस परियोजना को मिलने वाला आवंटन केवल प्रतीकात्मक रहा है। बजट 2024-25 में मात्र 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। यह मामूली आवंटन परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है, और यही ग्रामीणों की नाराजगी का ...