पूर्णिया, दिसम्बर 4 -- प्रस्तुति : गौरव कुमार मिश्रा तारापुर का सरकारी बस स्टैंड, लगभग 76 वर्ष पुराना, आज जर्जर स्थिति और लापरवाही का प्रतीक बन गया है। करीब 8 बीघा क्षेत्र में फैला यह स्टैंड प्रतिदिन लगभग 13 हजार रुपये का राजस्व देता है और 10 बसें विभिन्न रूटों पर जाती हैं। इसके बावजूद भवन खंडहर हो चुका है, टिकट काउंटर एक छोटे टूटे कमरे में चलता है और बिजली कनेक्शन न होने से गर्मी व अंधेरे में काम दुष्कर हो जाता है। यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय ध्वस्त है, उन्हें पेड़ के नीचे बैठना पड़ता है। पीने के पानी के लिए केवल एक सरकारी चापाकल ही सहारा है। दिव्यांग शौचालय बंद पड़े हैं और सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है - कचरे के ढेर, नालियों की गंदगी और मच्छरों से वातावरण अस्वच्छ बना रहता है। शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा सुरक्षा चिंता बढ़ाता ह...