मिर्जापुर, जून 8 -- शोरूम-दुकानों में आभूषणों की चमक एवं खनक जिनकी वजह से पैदा होती है, वे कारीगर बदहाली में जीवन गुजार रहे हैं। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में चमक के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। उनके कमरों की छतें टपकती हैं। आर्थिंक तंगी के बीच बीमारी तनाव देती है। सरकारी योजनाओं से वंचित इन कारीगरों के लिए बैंकों से ऋण लेना एक सपना है। रोजगार के मौके दूर रहते हैं। हुनर को समय के अनुरूप बनाने के लिए प्रशिक्षण का अभाव है। बाहरी कारीगरों के आगे उपेक्षित भी हो रहे हैं। शहर का बसनही बाजार, त्रिमोहानी और गणेशगंज का इलाका आभूषण कारोबार के लिए प्रसिद्ध है। यह कारोबार कारीगरों के बूते टिका है। उन्हीं की बदौलत दुकानों की रौनक, गहनों की चमक और ग्राहकों की भीड़ दिखती है। वे सोने को सांस, चांदी को आकार और धातु को भाव देते हैं। इन कारीगरों के बिना हार, झुमक...