मथुरा, दिसम्बर 11 -- जिले में हजारों दिव्यांगजनों के सपनों के पंख तो मजबूत हैं, मगर व्यवस्था की बंदिशें उन्हें रोज-रोज काटती हैं। आज भी दिव्यांगजन अपने हक, जरूरत और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। पेंशन, शिक्षा, इलाज, यात्रा, रोज़गार तक, जीवन की हर राह उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं। सरकारी योजनाएं भले ही कागजों में मौजूद हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कहती है कि दिव्यांगजन अब भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। हिन्दुस्तान के बोले संवाद में दिव्यांगजनों ने अपना दर्द बयां किया। जिले में करीब 51 हजार दिव्यांगजन हैं, लेकिन सरकारी सुविधाओं का लाभ कुछ ही दिव्यांगों को मिल पा रहा है। फिलहाल मात्र एक चौथाई 13 हजार दिव्यांगों को ही एक हजार रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। शेष दिव्यांग आज भी हक से वंचित हैं। दिल्ली सरकार द्वारा दिव्यांग पेंशन बढ़ाकर पांच हजार...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.