बोकारो, जनवरी 10 -- झारखंड का निर्माण ही जल, जंगल, जमीन के अनुसार किया गया था। लेकिन सरकार की नीतियों के बाद भी अधिकारी कानून को अपने अनुसार तोड़ मरोड़ कर लागू कर रहे है। वन संरक्षण कानून, भू-अधिग्रहण एक्त, पेसा कानून से लेकर कई प्रकार के कानूनों के माध्यम से ग्राम सभा को प्राकृतिक संसाधन पर अधिकार देने की बात कही गई है। इसके बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी कानून को मनमाने तरीके से लागू कर रहे है। ग्राम सभा को अधिकार है कि वे अपने प्राकृतिक संसाधन के दोहन पर अपने अनुसार रसीद काट सके। जंगल की कटाई से लेकर अन्य अप्रकृतिक चीजों पर रोक लगा सके। ग्राम सभा के मंजूरी के बाद भी अधिकारी अपने स्तर से कंपनी प्रबंधन के लिए काम कर रहे है। इससे यहां की प्राकृति संसाधनों पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है। कुछ एक ग्राम सभा को तीन-तीन सामुदायिक दावा निर्ग कर दिय...
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