प्रतापगढ़ - कुंडा, फरवरी 15 -- उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को छोटे-छोटे रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन स्तर से करोड़ों रुपये का फंड दिया जाता है लेकिन इसका 50 फीसदी लाभ भी महिलाओं को नहीं मिल रहा है। कारण यह धनराशि सीधे महिलाओं को नहीं दी जाती। यही कारण है कि इसका लाभ भी महिलाओं को सीधे नहीं मिल पाता। बेल्हा के स्वयं सहायता समूह की तमाम महिलाएं बैंक सखी, समूह सखी, विद्युत सखी, टीएचआर प्लांट, केयर टेकर, कोटे की दुकान से जुड़कर पारदर्शी तरीके से काम कर रही हैं लेकिन न उन्हें नियमित मानदेय दिया जाता है और न उनकी ओर से तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री करने के लिए उन्हें स्थान दिया गया है। अलग-अलग विभाग के काम में सहयोग करने के बाद भी महिलाएं मानदेय के लिए कई महीने चक्कर ...