बुलंदशहर, फरवरी 3 -- जिले की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां इन दिनों खुद आर्थिक कुपोषण के दंश से जूझ रही हैं। जिले में 3.90 लाख बच्चों के भविष्य की नींव रखने वाली यह महिलाएं महज 200 रुपये प्रतिदिन की पर काम करने को मजबूर हैं। यह रकम मनरेगा के एक अकुशल मजदूर को मिलने वाली दिहाड़ी से भी कम है। 16 ब्लॉकों की 3400 कार्यकत्रियां बढ़ती महंगाई और सरकार की बेरुखी के बीच अपना घर चलाने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। जिले के 3967 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैनात ये कार्यकत्रियां सुबह आठ बजे से मोर्चे पर डट जाती हैं। बच्चों को ककहरा सिखाने से लेकर गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण गोद भराई, पोषाहार वितरण और बच्चों के वजन की जांच तक का जिम्मा इन्हीं के कंधों पर है। इसके अलावा, प्रशासन इन्हें चुनाव में ड्यूटी और विभिन्न सर...