बिजनौर, अप्रैल 18 -- बिजनौर की माटी में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। खिलाड़ियों में मंजिल तक पहुंचने का जज्बा भी है लेकिन, संसाधनों का अभाव प्रतिभाओं को जंग लगा रहा है। बिजनौर के पहलवान बिना गुरु के ही सोना जीतने की राह पर चल रहे हैं और बिना गुरू के ही दांव पेच लगा रहे हैं। बिजनौर के पहलवान बिना गुरू के सोना जीत पाएंगे या नहीं यह तो समय ही बताएगा, लेकिन गांव की माटी से निकले पहलवान बिना गुरू के ही पसीना बहा रहे हैं। दांव लगाकर सामने वालों को चारों खाने चित करने वाले पहलवान अव्यवस्थाओं के मकड़जाल में फंस गए हैं। नेहरू स्टेडियम में कुश्ती कोच नहीं है। बिजनौर के पहलवानों का कहना है कि लंबे समय से नेहरू स्टेडियम में प्रशिक्षण देने के लिए कुश्ती कोच की तैनाती नहीं है। ऐसे हालात में बिना गुरू द्रोणाचार्य के अुर्जन कैसे निकलेंगे। जिले के लोगों का...
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