बाराबंकी, अगस्त 6 -- बरसात का मौसम ग्रामीण इलाकों में उम्मीद के साथ ही आफत भी लेकर आता है। जिले के रामनगर, फतेहपुर, रामसनेहीघाट और सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र नदियों की कटान और बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यहां की ग्रामीण आबादी हर साल बारिश के साथ ही उजड़ने को मजबूर हो जाती है। सरयू, कल्याणी और गोमती जैसी नदियों के तेज प्रवाह से हर साल सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि नदी में समा जाती है। सैकड़ों किसानों के आशियाने पानी में बह जाते हैं। कई बार तो लोग जान बचाकर ही बाहर निकल पाते हैं। सरयू की लहरें हर साल आशियाने बहा ले जाती हैं, लेकिन सरकारी वादे हर साल सिर्फ हवा में बह जाते हैं। तराई क्षेत्र के ये परिवार अब भरोसा भी खो चुके हैं। नदी किनारे बसे गांवों में हर साल सरयू, घाघरा और सहायक नदियों के तेज बहाव के चलते कटान की त्रासदी देखी जाती है। करीब...
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