बाराबंकी, सितम्बर 8 -- बरसात का मौसम जहां किसानों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आता है, वहीं परंपरागत खेती के अतिरिक्त वैकल्पिक की खेती करने वाले किसानों के लिए यह अक्सर मुसीबत साबित होता है। कभी बेमौसम बारिश तो कभी जलभराव से फसलें नष्ट हो जाती हैं और जो बचती हैं वह मंडियों तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती हैं। केला व सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों की मेहनत और संघर्ष का फल उन्हें आज भी उचित रूप में नहीं मिल पा रहा है। जिले के अधिकांश किसान वैकल्पिक की खेती पर पूरी तरह आश्रित हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो इन्हें भंडारण की सुविधा मिलती है, न मंडी में सही दाम और न ही वर्षा-बाढ़ या फसल नुकसान की भरपाई की जाती है। किसान बोले कि बाजार, ट्रांसपोर्ट, कोल्डचेन की सुविधा मिले तो वैकल्पिक की खेती फायदे का सौदा साबित हो। बोले फसल भंडारण की सुविधा हो तो ...
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