बाराबंकी, नवम्बर 23 -- बिजली विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया तेज़ होते ही संविदा कर्मचारियों में गहरा असंतोष और भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आने लगी हैं। विभागीय ढांचे में बदलाव की संभावित तैयारी ने हजारों कर्मचारियों को असमंजस की स्थिति में ला खड़ा किया है। सूत्रों के अनुसार, निजीकरण के बाद कई सरकारी व संविदा कर्मचारियों की सेवाओं पर असर पड़ सकता है, जिसे लेकर कर्मियों के बीच भय और असुरक्षा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वह वर्षों से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन निजी हाथों में संचालन जाने के बाद उनकी नौकरी की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। कर्मचारी संगठनों ने खुलकर इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि बिना किसी ठोस नीति के निजीकरण थोपने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें न तो कर्मचारियो...