बाराबंकी, दिसम्बर 8 -- तहसील व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे मजबूत कंधा मानी जाने वाली आशा कार्यकत्रियां आज समस्याओं से जूझ रही हैं। सरकार की ओर से मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जनसंख्या नियंत्रण, पोषण अभियान, दवा वितरण, प्रसव संबंधित सेवाएं, अस्पताल रेफर, दवा उपलब्ध कराना, जागरूकता अभियान जैसी जिम्मेदारियां निभाने वाली आशाएं आज भी उचित मानदेय और सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। आशा कार्यकत्रियों ने बताया कि काम तो बढ़ते जा रहे हैं लेकिन मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं सिर्फ फाइलों और रिकॉर्ड में दिखाई देती हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। एक आशा कार्यकत्री ने बताया कि हम महीने भर मेहनत करते हैं, रात-दिन मरीजों का फोन उठाते हैं, डिलीवरी में अस्पताल ले जाते हैं, लेकिन मान...