बहराइच, नवम्बर 23 -- बिना संसाधनों के जर्जर तारों पर दौड़ते करंट के प्रवाह को नियंत्रित कर पांच लाख से अधिक घरों को रोशन करने वाले बिजली संविदा कर्मी समान कार्य व समान वेतन की मांग बहुत दिनों से कर रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बिजली विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया के बीच संविदा कर्मचारियों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं हैं। इसकी आड़ में उनका आर्थिक शोषण और नौकरी से बाहर निकाले जाने का खतरा महसूस हो रहा है। उन्हें समय से न तो पगार मिल रही है और न ही हादसा होने पर जरूरी मदद ही मिल पाती है। बावजूद जिंदगी दांव पर लगाकर परिवार की जीविका खींचने वाले 859 बिजली संविदा कर्मी कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं। खासतौर से भविष्य को अंधेरे में देखते हुए निजीकरण का लगातार विरोध कर रहे हैं ताकि सरकार व सिस्टम उनके दर्द को महसूस कर पूर्व की व्यव...