बहराइच, नवम्बर 14 -- देश के भावी कर्णधारों को गढ़ने वाले परिषदीय विद्यालयों की हालत खस्ताहाल है। सूबे के आठ पिछड़े जनपदों में अपना बहराइच भी शामिल है। नीति आयोग की निर्धारित सूचकांकों में शिक्षा का पिछड़ेपन में शामिल जिले की शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। 2803 विद्यालयों में तकरीबन साढ़े छह लाख छात्र छात्राओं का पंजीकरण हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने आ रहे भवन की दशा बदहाल है। तकनीकी टीम ने 217 विद्यालयों के भवनों को जर्जर माना है, जिसके चलते 45 विद्यालयों को दूसरे भवनों में विलय भी कर दिए गए हैं। समायोजन के साथ शिक्षकों की कमी शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े जिले के बेसिक स्कूलों में शिक्षण कार्य सुचारू तरीके से चलाने में बाधा बन रही है। गिने चुने ही ऐसे स्कूल हैं, जहां शिक्षण कार्य बेहतर हो रहा है। वहां के नौनिहाल जहां जाते ह...
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