बहराइच, जुलाई 14 -- सीमित संसाधनों के बीच जर्जर तारों पर दौड़ते करंट के प्रवाह को नियंत्रित कर लगभग पांच लाख घरों को रोशन करने वाले बिजली संविदा कर्मी निजीकरण का विरोध यूं ही नहीं कर रहे हैं बल्कि इसकी आंड़ में उन्हें आर्थिक शोषण और नौकरी से बाहर निकाले जाने का खतरा महसूस हो रहा है। न तो समय से पगार मिल पा रही है, न ही हादसा होने पर मुकम्मल मदद। इसके बावजूद जिंदगी दांव पर लगाकर परिवार की जीविका खींचने वाले 859 बिजली संविदा कर्मी निजीकरण रोकने के लिए लगातार विरोध जता रहे हैं ताकि सरकार व सिस्टम उनके दर्द को महसूस कर पूर्व की व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति का कार्य कराती रहे। हिन्दुस्तान ने संविदा कर्मियों से सरकार के निजीकरण फैसले पर व उनकी समस्याओं के बारे में बातचीत की तो उनका दर्द सामने आया। बिजली कर्मी सरकार के निजीकरण फैसले का विरोध कर...
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