बस्ती, अप्रैल 19 -- Basti News : बढ़ते परिवार व परिवारों के बीच जमीन के बंटवारे के बाद कम होती जोत ने सीमांत किसानों को मजदूर बनने पर मजबूर कर दिया है। कर्ज लेकर अगर फसल बोई तो इस बात का खतरा रहता है कि मौसम का साथ नहीं मिला तो अन्न के मोहताज होंगे। ऊपर से बैंक या निजी साहूकार के कर्जदार भी। पिछले कुछ वर्षों में बीज, खाद, डीजल और खेती में प्रयोग होने वाले अन्य रसायन के बेतहाशा महंगे होने व बढ़ती महंगाई के हिसाब से फसल का दाम नहीं बढ़ने से छोटे किसानों की कमर टूट गई है। घर में दो जून की रोटी जुटाने के लिए इन किसानों के परिवार के अधिकतर लोग मजदूरी पर निर्भर हैं, लेकिन परिवार में शादी विवाह, बच्चों की पढ़ाई, दवा-इलाज सब कुछ भगवान भरोसे है। 'हिन्दुस्तान से बातचीत में सीमांत किसानों ने अपनी परेशानियां साझा कीं। वर्तमान में जिले की कुल आबादी तक...
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