बरेली, अप्रैल 9 -- अपने हैं, कहां जाएंगे, साथ रहेंगे ही। यह निश्चिंतता गलत भी नहीं है, लेकिन हमारी खोज-खबर लेना ही भूल गए। पड़ोस तक आते हैं, मगर इधर मिलना-जुलना गवारा नहीं है। जब ऐसी उपेक्षा होगी तो नगर निगम, बीडीए या दूसरे महकमे हमारी आवाज को नजरंदाज करेंगे ही। क्या बताएं, कॉलोनी में नालियां टूटी, जलभराव व टूटी सड़क से उड़ रही धूल के चलते कई घरों की खिड़कियां कई दिनों तक नहीं खुलतीं। यह कहना है बालाजी धाम कॉलोनी के नागरिकों का। कॉलोनी की यह गली गंदगी में डूबी है। नाली में जमा गंदगी सड़ चुकी हैं। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। बच्चे जोखिम उठाकर स्कूल जाते हैं, बीमारियां घर-घर में पनप रही हैं। मोहल्ले के लोग बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे है। आश्वासन मिले बहुत, पर हालात नहीं सुधर सके। लोग कहते हैं- जख्म गहरे हैं मगर मरहम लगाने वाला नहीं...
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