फर्रुखाबाद कन्नौज, फरवरी 14 -- फर्रुखाबाद। जरदोजी कारोबार में जब से मशीनीकरण की आंच आयी है तब से यह काफी दुश्कर हो गया है। मशीन से बना माल कम लागत में तैयार होने से हस्तकला के अद्भुत प्रदर्शन के मायने कमजोर होने लगे हैं। मशीनीकरण की वजह से अब हाथ हार गए हैं और यह दस्तकारी दम तोड़ रही है। हाजी मुजफ्फर हुसैन रहमानी कहते हैं कि लंदन कनाडा के अलावा खाड़ी देशों से पहले जो लहंगों आदि की मांग आती थी वह अब नहीं आ रही है। जीएसटी में उलझे इस उद्योग की चमक ने न जाने कितने देशों को प्रभावित किया है। जरी-जरदोजी के काम ने भले ही उद्योग का रूप ले लिया है मगर इस काम में तमाम तरह की विसंगतियों से उद्यमी और व्यापारी परेशान होने लगे हैं। जनपद ही नहीं आसपास क्षेत्र के हजारों लोगों को इस कारोबार से रोजगार मिला है। पर पहले जिस तरह से विदेशों से आर्डर आते थे वह अ...
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