गंगापार, मार्च 18 -- कोरांव विकास खंड के 115 ग्राम सभाओं में स्थित प्राचीन कुंए और तालाब कभी ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। ये जलस्त्रोत न केवल पेयजल और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण थे, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र भी थे। वर्तमान में इनका उपयोग केवल शादी-विवाह जैसे अवसरों पर पूजन-अर्चन तक सीमित रह गया है, जबकि नियमित देखभाल और सफाई के अभाव में ये जलस्रोत अब सूख चुके हैं या कचरे से भर गए हैं। हालांकि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने मनरेगा के अंतर्गत तालाबों का जीर्णोद्धार कराकर अमृत सरोवर का नाम देते हुए इनके रखरखाव और जल संचयन की महती योजना शुरू की है लेकिन धनाभाव और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह योजना परवान होती नहीं दिखाई दे रही है। धान की खेती के लिए जाना जाने वाला कोरांव सिंचाई के संकट से गुजर...
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