भागलपुर, दिसम्बर 1 -- पूर्णिया शहर की सड़के, नालियां, गलियां, मैदान और यहां तक कि खेत भी अब प्लास्टिक की कचरा से अछूते नहीं बचे हैं। हर दिन निकलने वाले 60 से 70 टन कचरा में करीब 10 टन केवल प्लास्टिक का कचरा होती है। यह आंकड़ा जितना बड़ा है उससे भी कहीं अधिक बड़ा है इसका दुष्प्रभाव - धरती से लेकर आकाश तक। प्लास्टिक ना तो मिट्टी में घुलता है ना ही पानी में और ना ही समय के साथ खत्म होता है। बल्कि यह हवा पानी मिट्टी और जीवों के जीवन में धीरे धीरे जहर घौलता जा रहा है। सबसे पहले असर नालियों पर पड़ता है। नालियों पर जो प्लास्टिक थैलियां और रैपरो से जाम हो जाता है। बरसात होने के साथ ही शहर के कई वार्डों में पानी सड़कों पर भर जाता है। इसके साथ ही घरों में पानी घुसने लगता है। नाली में प्लास्टिक भर जाने से समय समय पर साफ सफाई नही होने से नालियों में ...