भागलपुर, जुलाई 18 -- प्रस्तुति: रजनीश बदलते दौर में संघर्षरत रेडीमेड कपड़ों के दुकानदार का व्यवसाय अब धीमा पड़ गया है। शादी विवाह अथवा पर्व त्योहार के मौके पर रेडीमेड कपड़ों के दुकानदार की चांदी रहती थी। दो दशक पहले इनकी मार्केट में तूती बोलती थी। रेडीमेड कपड़े दुकानदार आज ऐसे चौराहे पर खड़े हैं, जहां हर ओर चुनौतियां हैं। मॉल, ऑनलाइन बाजार, घटती आमदनी, बढ़ता कर्ज और उपेक्षा के इस दौर में उन्हें न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानसिक पीड़ा से भी जूझना पड़ रहा है। जरूरत है कि सरकार, समाज और व्यापारिक संगठन मिलकर इन दुकानदारों के लिए पुनर्जीवन का रास्ता तैयार करें। ज का बदलता बाजार और तकनीक की तेज रफ्तार छोटे दुकानदारों के लिए चुनौती बन गई है। रेडिमेड कपड़ों के व्यापार से अपनी आजीविका चलाने वाले दुकानदारों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। एक स...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.