भागलपुर, फरवरी 19 -- -प्रस्तुति: अमित कुमार गोस्वामी रजनीश पूर्णिया शहर की सड़कें, नालियां, गलियां, मैदान और यहां तक कि खेत भी अब प्लास्टिक के कचरे से अछूते नहीं रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली की सुविधा ने जिस प्लास्टिक को रोजमर्रा की जरूरत बना दिया, वही आज शहर की सेहत पर सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। प्रतिदिन नगर क्षेत्र से निकलने वाले लगभग 60 से 70 टन ठोस कचरे में करीब 10 टन केवल प्लास्टिक का कचरा होता है। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी भी है। प्लास्टिक न तो मिट्टी में घुलता है, न पानी में और न ही आसानी से नष्ट होता है। दशकों तक जस का तस पड़ा रहने वाला यह कचरा धीरे-धीरे पर्यावरण में जहर घोलता रहता है। सबसे पहले इसका दुष्प्रभाव शहर की जल निकासी व्यवस्था पर दिखाई देता है। सड़कों और बाजारों में फेंकी ग...