भागलपुर, अप्रैल 22 -- खुशी का कोई भी मौका हो तो सबसे पहले मिठाई की याद आती है। हलवाई समाज परंपरागत तौर पर मिठाई बनाने का काम कर रहे हैं। हालांकि आधुनिक दौर में दूसरी जाति के लोगों ने भी यह काम शुरू कर दिया है, जिससे हलवाई समाज के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। एक जमाना था जब बाजार में हलवाई पट्टी होती थी। पर्व त्योहार और विभिन्न आयोजनों पर मिठाई बनाने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती थी। साथ-साथ मिठाई बेचना भी इनका काम था। जानकारी के अनुसार, पूर्णिया विधानसभा क्षेत्र में पांच से छह हजार तक हलवाई समाज की मिठाई एवं नाश्ते की दुकानें हैं। जिले में 10 से 20 हजार हलवाई समाज के लोग इस पेशे में हैं। जिले में अमूमन एक करोड़ से अधिक की रोजना मिठाई की बिक्री होती है। संवाद के दौरान हलवाई समाज के लोगों ने अपनी समस्याएं बताईं। 40 हजार के करीब है हलवा...
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