भागलपुर, मार्च 9 -- तरबूज के किसानों की परेशानी : प्रस्तुति : भूषण/ सुबोध -600 हेक्टेयर के करीब पूर्णिया में होती है तरबूज की खेती -किसानों को 200000 तक होती है प्रति एकड़ आमदनी -जिले में 4 से अधिक नदियों के किनारे हो रही है खेती -आम, लीची और जामुन जैसे सीजनल फल की तरह तरबूज और खरबूज की खेती आरंभिक काल से पूर्णिया समेत पूरे सीमांचल की नदियों के कछार पर बड़े पैमाने पर होती रही है। आरंभिक काल से पूर्णिया और इसके आसपास के जिलों में कोसी नदी की कई धारा एवं उप धारा चलती थी जिसके किनारे बालू जमा रहते थे और बड़े विस्तृत भूभाग पर दियारा इलाका होता था। दूसरी ओर महानंदा, कनकई और पनार नदी के कछार पर और कोसी नदी के किनारे भी दियारा जैसा इलाका है। मिट्टी बलुई है। इस दियारा इलाके के लोगों की जिंदगी काफी विपन्नता में बीतती थी। दियारा इलाके में अनाज की ख...
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