भागलपुर, फरवरी 19 -- -प्रस्तुति : सुभाष पांडेय सिकंदरा प्रखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए बहुआर नदी कभी जीवनरेखा मानी जाती थी। नदी का जल नवाबगंज के समीप बने बीयर तक पहुंचता था और वहां से खुटकट, भूल्लो, नवाबगंज, सिकंदरा, अचम्भो, रामडीह, कर्मा, सिझौड़ी, टाल सहित कई गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी उपलब्ध होता था। आगे चलकर यही पानी हलसी प्रखंड के मतासी और घोंघसा तक पहुंचता था। इससे किसानों को वर्ष भर खेती करने में सहूलियत मिलती थी और भूजल स्तर भी संतुलित रहता था। लेकिन कुंड घाट जलाशय योजना के निर्माण के बाद स्थिति बदल गई। बहुआर नदी के उद्गम स्थल पर बांध बनाकर जलाशय तैयार कर दिया गया, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा अवरुद्ध हो गई। परिणामस्वरूप नदी में पहले की तरह पानी का प्रवाह नहीं हो पा रहा है। नवाबगंज के समीप बना बीयर अब पर्याप्त पानी स...
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