भागलपुर, अप्रैल 10 -- नदियां जीवनदायिनी हैं। ये न केवल प्राकृतिक संसाधन हैं, बल्कि हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन की अभिन्न हिस्सा हैं। जिले की प्रमुख नदियां, जो कभी अपनी विशालता और जलप्रवाह के लिए प्रसिद्ध थीं। अब सूखने और सिकुड़ने लगी हैं। इस कारण जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट में वृद्धि हो रही है जो न केवल प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रही है। बल्कि कृषि क्षेत्र और स्थानीय समुदायों के जीवन को भी प्रभावित कर रही हैं। हिन्दुस्तान के साथ संवाद के दौरान नदी किनारे रहने वाले लोगों ने अपनी समस्या बताई। 02 हजार से अधिक किसान हो रहे हैं नदी सूख जाने से प्रभावित, फसलें सूख रहीं 01 सौ से 150 ट्रकों का रोज होता है आवागमन, टूटती हैं इलाके की सड़कें 01 ही बड़ी नदी है गिद्धौर के किनारे जिससे होती है फसलों की सिंचाई नदिय...
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