भागलपुर, मार्च 27 -- जमुई जिला कृषि प्रधान जिला है। जिले के लोग खेती कर जीवन-यापन करते हैं। जिले में कोई उद्योग नहीं है। खेती पर ही परिवार चलाने से शादी-विवाह तक का खर्च तक निर्भर है। किसान खेती के लिए निजी दुकानों से महंगी दर पर खाद-बीज खरीदने को मजबूर है। यूरिया के साथ सल्फर, आयरन, जिंक खरीदने के लिए बाध्य हैं। बिहार सरकार द्वारा जिले में डीएपी की आपूर्ति कम हुई है। किसान बिना लाइसेंस प्राप्त दुकानदारों से खाद लेने को मजबूर हैं। नकली खाद-बीज की पहचान में वैज्ञानिकों से मदद नहीं मिल पाती हैं। पटवन की चुनौती भी बनी रहती है। 35 हजार हेक्टेयर में होती है जिले में रबी फसलों की खेती 31 साल होने के बाद भी किसानों की समस्या नहीं हुई दूर 35 से 40 किलो तक एक एकड़ में बीज की होती है जरूरत जमुई जिला बने हुए करीब 31 साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसान...
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