भागलपुर, जुलाई 13 -- प्रस्तुति : शंकर कुमार सिंह झाझा शहर में मात्र एक खेल मैदान है, जो रेलवे के अधीन है। लेकिन मैदान तक पहुंचने के लिए समुचित रास्ता नहीं है, न ही रोशनी की कोई व्यवस्था है। चारदीवारी जर्जर हो चुकी है और बारिश में मैदान तालाब बन जाता है। चारों ओर फैला कूड़ा-कचरा स्थिति को और बदतर करता है। इसके कारण खेल में भविष्य बनाने का सपना देखने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बिहार पुलिस व होमगार्ड की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है। क्रिकेट व फुटबॉल खिलाड़ियों को भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानी होती है। खेखेल से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी होता है- यह निर्विवाद सत्य है। खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व जैसे गुणों को विकसित करता है। लेकिन झाझा शहर का ए...
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