जमशेदपुर, फरवरी 25 -- भारत में प्रत्येक समुदाय की अपनी एक पहचान है और कई व्यवसाय पारंपरिक रूप से इनसे जुड़े होते हैं। इसी तरह शहर में तुरहा समाज के लोग सब्जी, फल और मछली विक्रेता के रूप में जाने जाते हैं। झारखंड में इनकी संख्या सीमित है। इसके बावजूद उन्हें न तो अल्पसंख्यक होने का लाभ मिल पा रहा है और न ही सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का कोई फायदा। समाज के लोगों ने हिंदुस्तान को अपनी समस्या बताई और सरकार से समाधान की मांग की। सड़कों के किनारे सब्जी बेचने वाले ज्यादातर लोग तुरहा समाज के होते हैं, जिनका मुख्य पेशा सब्जी, फल और मछली बेचना है। इनका जीवन एक दैनिक मजदूर की तरह ही होता है। हर सुबह सड़क किनारे दुकानें लगाते हैं और शाम होते ही अपना सामान समेटकर घर लौट जाते हैं। जमशेदपुर में तुरहा समाज की कुल आबादी लगभग 2500 है, जबकि पूरे झारख...
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